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Mungantiwar forgot to say 'M' on inflation : महंगाई पर मुनगंटीवार ‘म’ बोलना भी भूल गए


सत्ता की कुर्सी पर बैठते ही पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों पर साध ली चुप्पी !

चुनावी भाषणों में भी बढ़ती महंगाई का जिक्र करने से डर रही हैं भाजपा

वर्ष 2014 के पूर्व महंगाई पर तांडव करने वाली BJP और उसके नेताओं ने बीते 10 वर्ष में बढ़ती महंगाई पर न तो कोई आंदोलन किया और न ही महंगाई पर कोई ठोस बयान दिया। भाजपा के वरिष्ठ नेता सुधीर मुनगंटीवार ने 31 मई 2014 के भारत बंद आंदोलन में तो स्वयं अगुवाई की थी। लेकिन इसके बाद देश की और खासकर चंद्रपुर जिले में मौजूद व बढ़ती महंगाई पर एक शब्द भी नहीं निकाला। और न ही कभी पेट्रोल व डीजल के बढ़ते दामों पर चिंता व्यक्त की। सत्ता की कुर्सी पर बैठते ही भाजपा नेता मुनगंटीवार अनेक विभागों के मंत्री बने, बरसों से चंद्रपुर जिले के पालकमंत्री बने। लेकिन दोबारा कभी भी महंगाई का जिक्र तक नहीं किया। और न ही उनके समर्थक व भाजपाईयों द्वारा महंगाई पर ‘म’ भी नहीं कहा जा पा रहा है। इसके चलते महंगाई पीड़ित जनता अब भाजपा और उसके नेताओं की नीति पर सवाल उठाने लगे हैं।


क्या भाजपा को जनता माफ करेगी ?

शायद आपको अच्छी तरह से याद होगा कि भारतीय जनता पार्टी की ओर से वर्ष 2014 के चुनावों के मुहाने पर एक वीडियो विज्ञापन पेश किया था। इस विज्ञापन में एक महिला कहती है कि – ‘पेट्रोल-डीजल के दाम हर बार बढ़ते गए तो स्कूटर खड़ा कर दिया। बस से चलने लगे। पढ़ाई-लिखाई के खर्चों ने हमारी जेबें खाली कर दी। फिर भी मन मारकर काम चलाया। पर जब रोज-रोज की हर जरूरत की चीजों के दाम लगातार बढ़ते जाएंगे तो हम अपने बच्चों का भाविष्य कैसे बनाएंगे? उन्हें क्या खिलाएंगे ? महंगाई को लगातार बढ़ाने वालों, जनता माफ नहीं करेगी। चलो हालात बदलें, देश की सरकार बदलें……!’ अब बीते 10 वर्षों में न तो महंगाई कम हुई है और न ही पेट्रोल-डीजल के दाम घटे हैं। ऐसे में महंगाई के खोखले विज्ञापनों से वोट बंटोरकर सत्ता हथियाने वालों को मौजूदा मतदाता क्या वाकई में माफ कर पाएंगे ? सवाल चर्चा, चिंता व चिंतन का विषय बना हुआ है।


सर्वसामान्य जनता के हाल पर मुनगंटीवार चुप क्यों ?

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2014 के पूर्व तत्कालीन मनमोहन सिंह की सरकार के खिलाफ भाजपा और चंद्रपुर के स्थानीय नेताओं ने सुधीर मुनगंटीवार के नेतृत्व में 31 मई 2012 को भारत बंद के आंदोलन में हिस्सा लिया था। इस दौरान भारतीय जनता पार्टी के चंद्रपुर महानगर शाखा की ओर से बाकायदा पत्रक बांटे गए। इन पत्रकों में मुनगंटीवार ने अपनी तस्वीर चस्पा ली। इसमें लिखा गया था कि केंद्र सरकार की ओर से पेट्रोल-डीजल के दाम बेतहाशा बढाये जा रहे हैं। इसके चलते सर्वसामान्य जनता का बुरा हाल हो रहा है। इसलिए तत्कालीन केंद्र सरकार का निषेध करने के लिए भाजपा के भारत बंद में नागरिकों को स्वयं स्फुर्ति से शामिल होने की अपील की गई थी। लेकिन मुनगंटीवार ने जनता की सहानुभूमि व वोट पाकर मंत्री तो बन गए परंतु बीते 10 वर्षों में कभी भी महंगाई के खिलाफ एक शब्द भी नहीं कहा। अब उन्हें सर्वसामान्य जनता का हाल क्यों नहीं दिखाई पड़ रहा है ? अब कोई आंदोलन भाजपा क्यों नहीं कर पा रही है ? यह सवाल जनता पूछने लगी है।


पेंसिल, शार्पनर, आटा, दूध-दही, ब्रेड के महंगे होने पर मुनगंटीवार का बयान अजिबोगरीब

गत 18 जुलाई 2022 को भाजपा नेता सुधीर मुनगंटीवार ने एनडीटीवी को दिये एक बयान में महंगाई पर अजिबोगरीब दलीलें दी। बच्चों के पेंसिल और इरेजर के दाम बढ़े आम जनता के अनाज पर भी जीएसटी लगाया गया था। इस पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए मुनगंटीवार ने कहा कि जीएसटी 1 जुलाई 2017 को आया। जीएसटी कौंसिल के फैसले से ही पेंसिल, शार्पनर, आटा, दूध-दही, ब्रेड आदि वस्तुओं पर जीएसटी लगाया गया। जीएसटी मामले में केंद्र सरकार दोषी नहीं है। पेंसिल व शार्पनर पर जीएसटी लगाने से सरकार को कोई बहुत लाभ नहीं होगा। अब मुनगंटीवार के बयान पर सवाल यह उठाता है कि उनकी भाजपा वाली केंद्र सरकार एवं अनेक राज्यों में भाजपा व भाजपा समर्थक प्रदेश सरकारों के प्रतिनिधि बहुसंख्यता से जीएसटी कौंसिल में हैं। इसके बावजूद मुनगंटीवार अपने भाजपा सरकार के फैसलों से पल्ला झाड़ते हुए दिखाई दे रहे हैं।