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Reduction in cooperative sector of Chandrapur in 10 years : 10 वर्ष में सहकार क्षेत्र का बंटाधार


मोदी, शाह, फडणवीस व मुनगंटीवार के प्रयासों के बावजूद चंद्रपुर की 768 सहकारी संस्थाएं बंद

गत 6 अक्टूबर 2017 को तत्कालीन महाराष्ट्र सरकार ने उस समय के मुख्यमंत्री व वर्तमान गृहमंत्री देवेंद्र फडणवीस की एक खबर को ट्विट कर सहकार क्षेत्र को मजबूत करने के लिए कटिबद्ध होने की घोषणा करते हुए राज्य सहकारी संघ को आश्वस्त किया था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की “सहकार से समृद्धि” की परिकल्पना को साकार करने के उद्देश्य से गत 6 जुलाई 2021 को सहकारिता मंत्रालय की स्थापना की गई थी। इसका जिम्मा स्वयं केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पर सौंपा गया। वहीं चंद्रपुर जिले की बात की जाएं तो बरसों से यहां भाजपा की सत्ता रही है। BJP के वरिष्ठ नेता व मंत्री सुधीर मुनगंटीवार जिले के पालकमंत्री रहे हैं। लेकिन बीते 10 वर्षों के सहकारिता के इतिहास में चंद्रपुर जिले की 786 सहकारी संस्थाएं बंद हो गई। इसके चलते भाजपा व सरकार की मंशा पर अनेक सवाल उठना लाजिम है।


10 वर्ष में 2282 संस्थाएं घटकर 1514 पर पहुंची

जब सरकारी रिपोर्ट को खंगाला गया तो चंद्रपुर जिले के सहकार क्षेत्र की स्थिति व प्रशासनीक आंकड़ों को देखकर बेहद खेदजनक तथ्य उजागर हुए। वर्ष 2013 के मार्च माह के अंत में जारी की गई रिपोर्ट के अनुसार जिले में विविध सहकारी संस्थाएं कुल 2 हजार 282 थीं। इन संस्थाओं में सभासदों की संख्या 76912 थी। इनमें कृषि पत संस्थाएं 566 थी। इसकी तुलना जब हमने वर्ष 2023 के मार्च अंत की सरकारी रिपोर्ट से की तो हमें ज्ञात हुआ कि जिले में वर्तमान में केवल 1 हजार 514 ही सहकारी संस्थाएं हैं। अर्थात जिले में कुल 786 संस्थाएं बंद हो चुकी हैं। हालांकि यही भी सच है कि संस्थाओं की संख्या घटने के बावजूद सभासदों की संख्या बढ़ी है। यह संख्या बढ़कर 781584 पर पहुंच गई है। 

कृषि सहकारी संस्थाएं 10 साल में घटे

हैरत की बात है कि हर सरकार किसानों के कल्याण के दावे करते आयी हैं। लेकिन जब हम किसानों से जुड़ी कृषि सहकारी संस्थाओं के प्रगति पर नजर ड़ालते हैं तो हमें निराशाजनक स्थिति दिखाई पड़ती है। चंद्रपुर जिले में 10 वर्ष पूर्व अर्थात वर्ष 2013 के समय जहां 566 कृषि पत संस्थाएं हुआ करती थी, वहीं अब वर्ष 2023 की प्रशासनीक रिपोर्ट के अनुसार यह संस्थाएं घटकर 391 पर पहुंच गई है। मतलब साफ है कि चंद्रपुर जिले में 175 कृषि पत संस्थाएं बंद हो चुकी है। जबकि गैर कृषि पत संस्थाएं 156 की संख्या में बढ़ गई है। यह स्थिति जिले के किसान व कृषि क्षेत्र के लिए चिंता की बात है। 

पणन संस्था व सामाजिक सेवा संस्थाएं भी घटे

बेहत चिंताजनक हालात यह है कि चंद्रपुर जिले में उत्पादक व सामाजिक सेवा संस्थाओं में काफी कमी दिखाई पड़ रही है। प्रशासनीक रिपोर्ट कहती है कि वर्ष 2013 में जहां चंद्रपुर जिले में 14 पणन संस्थाएं हुआ करती थी, वह घटकर अब 12 पर पहुंच गई है। हैरत की बात है कि उत्पादक व सामाजिक सेवा संस्थाएं जहां वर्ष 2013 में 1 हजार 342 हुआ करती थीं, वह घटकर वर्ष 2023 के मार्च अंत तक 594 पर पहुंच गई हैं। अर्थात इन सामाजिक संस्थाओं में 748 की कमी आयी है। इन घटती संस्थाओं से सामाजिक क्षेत्र में काम करने वाले समाजसेवकों को खासकर चिंता व चिंतन करने की आवश्यकता है।

PM मोदी का क्या है सपना ?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “सहकार से समृद्धि” के स्वप्न को साकार करने तथा सहकारिता क्षेत्र में नए किसान उत्पादक संगठन (FPO) के गठन और संवर्धन द्वारा किसान सदस्यों को लाभ पहुंचाने के केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के प्रयासों से सहकारिता क्षेत्र में 1,100 नए FPO के गठन का निर्णय लिया गया था। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने एफपीओ योजना के तहत राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) को इन 1100 अतिरिक्त FPO के आवंटन का फ़ैसला लिया। FPO योजना के तहत, प्रत्येक FPO को भारत सरकार द्वारा 33 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। साथ ही क्लस्टर आधारित व्यापार संगठन (CBBO) को FPO गठन के लिए प्रति FPO 25 लाख रुपये की राशि दी जाती है। इस निर्णय से PACS, जो आमतौर पर अल्पकालिक ऋण और बीज, उर्वरक आदि के वितरण का कार्य करती हैं, अब अन्य कृषि सम्बंधित आर्थिक कार्यकलाप करने में भी सक्षम होंगी। साथ ही पैक्स मधुमक्खी पालन, मशरूम की खेती, आदि जैसे उच्च आय अर्जित करने वाले उद्यम करने में भी सक्षम होंगी। 

नये और स्थायी स्त्रोत उत्पन्न करने का लक्ष्य

केंद्र सरकार की यह पहल सहकारी समितियों को आवश्यक बाजार लिंकेज प्रदान कर उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने में भी सहायक होगी। इससे पैक्स की व्यावसायिक गतिविधियों में भी विविधता आएगी तथा आय के नए और स्थायी स्रोत उत्पन्न होंगे। देश भर में सहकारिता आंदोलन को मज़बूत करने के लिए केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में सहकारिता मंत्रालय द्वारा उठाये गए विभिन्न अन्य कदमों के साथ यह पहल सहकारिता क्षेत्र, और खास तौर पर PACS को और गतिशील, व्यवहार्य, व वित्तीय रूप से स्थायी बनाने में अत्यंत सहायक सिद्ध होने का लक्ष्य निर्धारित किया गया।