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727 police personnel decreased in last 10 years in Chandrapur : 10 साल में घट गए 727 पुलिस

 

चाहिये 4,884 पुलिस कर्मी और कार्यरत हैं केवल 2,345

पुलिस कर्मचारी बढ़ाने व विकास में मंत्री मुनगंटीवार फेल

चंद्रपुर जिले के विकास का खोखला डंका पीटने वाले, सुंदर इमारतों व बागीचों का मोह दिखाने वाले, वोटों के लिए करोड़ों के महोत्सव लेने वाले जनप्रतिनिधियों एवं सरकारों ने कभी भी चंद्रपुर जिले में पुलिस कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने की दिशा में कोई पुख्ता कदम नहीं उठाया है। संयुक्त राष्ट्र के मानक के अनुसार एक लाख लोगों पर 222 पुलिस कर्मी होने चाहिए। अर्थात 450 जनसंख्या पर एक पुलिस कर्मचारी का होना अनिवार्य है। जबकि वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार जिले की कुल जनसंख्या 22 लाख 4 हजार 307 है। इसका मतलब साफ है कि जिले के पुलिस विभाग में कम से कम 4 हजार 884 पुलिस कर्मचारियों की आवश्यकता हैं। परंतु आपको यह जानकार आश्चर्य होगा कि वर्तमान में चंद्रपुर जिला पुलिस प्रशासन के पास केवल 2 हजार 345 ही पुलिस कर्मी कार्यरत हैं। मतलब संयुक्त राष्ट्र मानक के अनुसार हमारे जिले में कुल 2 हजार 539 पुलिस कर्मचारियों की कमी है। इस खामी भरे हालातों के मद्देनजर जिले में शांति व सुव्यवस्था बरकरार रखना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती है। पुलिस पर कितना ज्यादा दबाव होता है, इसका आप अंदाजा लगा सकते हैं। यही वजह है कि उन्हें दिन-रात क्षमता से अधिक सेवा देने, नींद न ले पाने, अपराधों की जांच करने, बंदोबस्त करने, अपने परिवार को समय न दे पाने आदि कारणों के चलते अत्याधिक तनाव और चिड़चिड़ेपण का शिकार होना पड़ता हैं। अनेक मामलों में तो पुलिस आत्महत्या जैसी वारदातें उजागर होती रही है। इसके बावजूद चंद्रपुर जिले में जोरदार विकास करने का नारा जिले के पालकमंत्री व भाजपा के वरिष्ठ नेता सुधीर मुनगंटीवार द्वारा दिया जाता रहा है। बरसों से वे जिले के पालकमंत्री रहे हैं, जबकि चंद्रपुर जिले में पुलिस की संख्या बढ़ाने में वे बुरी तरह नाकाम साबित हुए। क्योंकि बीते 10 साल में 727 पुलिस कर्मचारी घट गए हैं। 


नेताओं की रक्षा करने वाला पुलिस विभाग ही उपेक्षित

जब भी कोई मंत्री, वीआईपी, वीवीआईपी जिले में आते हैं तो पूरा पुलिस महकमा उनकी सुरक्षा को लेकर बेहद सतर्क रहता है। अधिकांश पुलिस कर्मचारियों की छुटि्टयां रद्द कर दी जाती है। अनेक पुलिस को साप्ताहिक अवकाश के दिन भी ड्यूटी पर बुला लिया जाता है। विशाल रैलियां व शोभायात्रा के बंदोबस्त का सिरदर्द तो होता ही है। कुल मिलाकर पूरा डिपार्टमेंट टेंशन में दिखाई पड़ता है। अफसरों की भी नींद उड़ जाती है। मंत्रियों व आला नेताओं के बंदोबस्त के समय तैनात किये जाने वाले पुलिस कर्मचारियों को घंटों भूखे रहना पड़ता है। कई बार तो पीने का पानी तक नसीब नहीं होता। इतने शिद्दत से नेताओं की सेवा करने के बावजूद पुलिस विभाग पर मंडराने वाले अतिरिक्त कार्य के बोझ को कम करने तथा पर्याप्त संख्या में पुलिस कर्मचारी उपलब्ध कराने में सरकार एवं नेतागण फेल होते दिखाई पड़ रहे हैं। चंद्रपुर जिले में बरसों से भाजपा नेता व पालकमंत्री सुधीर मुनगंटीवार सत्ता में रहें हैं। लेकिन वे भी इन हालातों को दूर करने में सफल नहीं हो पाएं।


प्रशासनीक रिपोर्ट ही खोल रही सत्ता की पोल

बीते 10 वर्षों की प्रशासनीक रिपोर्ट का हमने गहराई से अध्ययन किया। इन 10 वर्षों में पूर्व उपमुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की करीब 2 वर्ष चली सरकार को यदि छोड़ दिया जाएं तो 8 वर्ष भाजपा गठबंधन की सरकार ने ही सत्ता का सुख भोगा है। वर्ष 2013 में चंद्रपुर जिले में जहां 3 हजार 72 पुलिस अधिकारी-कर्मचारी हुआ करते थे, वहीं अब वर्ष 2023 के मार्च अंत तक यह संख्या घटकर केवल 2 हजार 345 पर पहुंच गई है। जबकि जिले में 22.04 लाख की जनसंख्या के अनुपात में न्यूनतम 4,884 पुलिस कर्मचारी होने चाहिये थे।

 

थाने व चौकियों की संख्या बढ़ी और पुलिस घटा दिए

जिले की जनता के आवश्यकता और सुविधाओं को देखते हुए भले ही सरकार ने बीते 10 वर्षों में थाने एवं चौकियों की संख्या बढ़ा दी, लेकिन पुलिस कर्मचारियों की घटती संख्या पर किसी मंत्री व किसी नेता ने ध्यान नहीं दिया। प्रशासनीक रिपोर्ट हमें बताती हैं कि वर्ष 2013 में जिले में 21 थाने हुआ करते थे। इसके अलावा 18 पुलिस आउट पोस्ट थे। वर्तमान में जिले में इनकी संख्या बढ़ा दी गई। अब जिले में 34 थाने, 14 पुलिस चौकियां और 16 आउट पोस्ट मौजूद हैं। लेकिन 727 पुलिस कर्मचारी घट गए। आश्चर्य की बात है कि पुलिस विभाग तक विकास की गंगा ने अब तक दस्तक ही नहीं दी। यह बताने की जरूरत नहीं है कि बढ़ती जनसंख्या और बढ़ते औद्योगिकरण के कारण अपराधों की संख्या में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है।
 

पुलिस पदभर्ती पर नहीं नेताओं का ध्यान

प्रशासनीक रिपोर्ट में घटती पुलिस संख्या पर चिंता जाहिर की है। नई पद भर्ती नहीं होने के कारण तथा आयुसीमा के चलते सेवानिवृत्ति की वजह से लगातार पुलिस विभाग में पद रिक्त हो रहे हैं। हालांकि पुलिस सिपाही भर्ती 2022-2023 के लिए 137 पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके अलावा 9 बॅन्डमैन भी भर्ती किये जा रहे हैं। गत 5 मार्च 2024 से आज (31 मार्च 2024) तक आवेदन करने की अंतिम तिथि निर्धारित की गई है। ऑनलाइन आवेदन के बाद चलने वाली लंबी प्रक्रिया के पश्चात ही जिला पुलिस प्रशासन को नये 137 पुलिस सिपाही मिलेंगे। लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि यह अतिरिक्त नये पुलिस कर्मचारी भी जनता के जरूरत के मुताबिक ऊंट के मुंह में जीरा की तरह अर्थात बेहद कम है।