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इंडस्ट्रियल एक्सपो : स्टंटबाजी है या बेरोजगारों का मजाक


शिवानी वडेट्‌टीवार व राजू झोडे ने मंत्री मुनगंटीवार को घेरा

स्थानीय युवाओं की उपेक्षा कर दिखावे और खुद की प्रसिद्धी के लिए चल रहा इवेंट

@चंद्रपुर
9 करोड़ के 3 दिवसीय ताड़ोबा महोत्सव को लेकर हो रही आलोचनाओं के बीच अब एक और नया विवाद छिड़ गया है। चंद्रपुर में 4 एवं 5 मार्च 2024 को आयोजित इंडस्ट्रियल एक्सपो एडवांटेज चंद्रपुर नामक सम्मेलन की मंशा पर सवाल उठाते हुए प्रदेश के मंत्री सुधीर मुनगंटीवार को घेरा गया है। प्रदेश युथ कांग्रेस की महासचिव व विरोधी दल नेता विजय वडेट्‌टीवार की सुपुत्री शिवाजी वडेट्‌टीवार ने इंडस्ट्रियल एक्सपो को स्टंटबाजी करार देते हुए अनेक गंभीर आरोप लगाये हैं। वहीं उलगुलान संगठन के अध्यक्ष राजू झोडे ने इसे चुनावी दिनों में बेरोजगारों का मजाक उड़ाने की करतूत करार दिया है। जबकि मंत्री मुनगंटीवार ने अपनी सफाई देते हुए आलोचकों को ईश्वर से सद् बुद्धि मिलने की कामना की है। 

क्यों उठा नया विवाद ?

चुनावों की सरगर्मियां तेज होने लगी है। स्पर्धाओं व महोत्सवों की भरमार जनता पर थोपी जा रही है। ऐसे में गत 1 से 3 मार्च तक चंद्रपुर में 9 करोड़ की लागत से ताड़ोबा महोत्सव आयोजित किया गया। अनेक स्थानीय नेताओं एवं चंद जागरुक जनता ने इस आयोजन के खर्च की आलोचना की। इस बीच 4 मार्च 2024 को चंद्रपुर में एडवांटेज चंद्रपुर इंडस्ट्रियल एक्सपो का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में 1 लाख करोड़ के निवेश को लेकर सामंजस्य करार किये जाने का दावा जिले के पालकमंत्री सुधीर मुनगंटीवार की ओर से किया गया। इस बीच शिवानी वडेट्‌टीवार एवं राजू झोडे ने मंत्री मुनगंटीवार को घेरते हुए इस आयोजन को स्टंटबाजी एवं बेरोजगारों का मजाक बताया है।

सम्मेलनों पर धन की बर्बादी करने के बजाय स्थानीय उद्योगों में लोकल युवाओं को 80 फीसदी भागीदारी दें – वडेट्‌टीवार

प्रदेश युथ कांग्रेस की महासचिव शिवाजी वडेट्‌टीवार ने अपने बयान में कहा है कि आज हम चंद्रपुर की पहचान करते समय इंडस्ट्रियल जोन इसे मानते है। वेकोलि के खानों के लिए भी चंद्रपुर की पहचान है। ऐसे में केवल और केवल मार्केटिंग स्टंट और विज्ञापन के लिए इंडस्ट्रियल एक्सपो सम्मेलन लिया जा रहा है, यह दिखावे के लिए प्रस्तुत किया जा रहा है। चंद्रपुर की जनता को पता है कि यहां इंडस्ट्रियल जोन होने के बावजूद स्थानीय युवाओं को यहां रोजगार नहीं मिल पा रहा है। चंद्रपुर में मौजूद उद्योग व कंपनियों में बाहरी क्षेत्र के लोगों को लाकर उन्हें रोजगार दिया जा रहा है। किसानों के बच्चों को यहां रोजगार नहीं मिल पा रहा है। इंडस्ट्रियल एक्सपो सम्मेलन में जो मंत्री व अतिथि आ रहे हैं, वे खुद की प्रसिद्धी के लिए है। इन सम्मेलनों पर धन की बर्बादी करने के बजाय स्थानीय युवाओं को यहां के उद्योग व कंपनियों में 80 फीसदी भागीदारी दिलाने के लिए इन्हें प्रयास करना चाहिये। चुनावों के मुहाने पर यह सब इवेंट की स्टंटबाजी चल रही है, इसे सरकार ने बंद करना चाहिये। उद्योग लाने के झूठे दावे जमकर किये जाते है। महाराष्ट्र के उद्योगों को गुजरात में भेजा जा रहा है और महाराष्ट्र को लावारिस की तरह छोड़ दिया जा रहा है। जो उद्योग मूलत: यहां है, उनमें स्थानीय युवाओं को रोजगार क्यों नहीं मिल रहा है, पहले इसका जवाब देना चाहिये। 

चुनावी मुहाने पर भाजपा नेताओं व मंत्रियों द्वारा बेरोजगारों का मजाक - झोडे

उलगुलान संगठन के अध्यक्ष राजू झोडे ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि चंद्रपुर जिले में अनेक उद्योग, कंपनियां निवेश करेगी। मंत्री सुधीर मुनगंटीवार के अगुवायी में आयोजित सम्मेलन चुनावी मुहाने पर बेरोजगारों का मजाक उड़ा रही है। भाजपा के नेता और मंत्री शिक्षित बेरोजगारों को गुमराह कर रहे हैं। जिले में उद्योगों की कमी नहीं है। विविध कंपनियों में गैरप्रांतीय लोगों को रोजगार दिया जा रहा है। इसके चलते स्थानीय युवा रोजगार से वंचित है। इन सम्मेलनों का उद्देश स्थानीय युवाओं को रोजगार देने का नहीं है, बल्कि खुद की प्रसिद्धी करने का है। पूर्व से शुरू उद्योगों में यदि 80 प्रतिशत स्थानीय युवाओं को रोजगार दिया जाता तो हालात इतने बुरे नहीं होते। बेरोजगारों को गुमराह करना और उनका मजाक उड़ाना बंद किया जाए। 5 वर्ष पूर्व इसी तरह से बेरोजगारों का मजाक उड़ाया गया था। 

ईश्वर उन्हें सदबुद्धि दें – मुनगंटीवार
जिले के पालकमंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने अपने उपर लग रहे आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि आलोचना करने वालों के पेट दर्द का कोई इलाज नहीं है। जब वे सत्ता में थे तो कुछ न कर सकें। दूसरे सत्ता में जाते ही इन्हें डर सताने लगता है। विकास की ओर सभी को बहुमत से देखना चाहिये। बेरोजगारों का मजाक उड़ाना, विकास पर उपहास करना योग्य नहीं है। ईश्वर इन्हें सद् बुद्धि दें। 

क्यों नहीं चंद्रपुर पहुंचे गडकरी व राणे

एडवांटेज चंद्रपुर इंडस्ट्रियल एक्सपो के उद्घाटन समारोह की निमंत्रण पत्रिका में केंद्रीय मंत्री नितीन गडकरी एवं नारायण राणे का भी नाम शामिल था। लेकिन इस सम्मेलन के आयोजन से उन्होंने मुंह क्यों मोड़ लिया ? इसका जवाब न तो भाजपा नेताओं की ओर से दिया गया और न ही मंत्री महोदय की ओर से कोई बयान जारी किया गया। वहीं जिला प्रशासन भी इस मुद्दे पर मौन है। 1 लाख करोड़ के सामंजस्य करार को लेकर भी जनता सवाल उठाने लगी है। ऐन चुनावी समय पर ही कैसे उद्योग व बेरोजगारों की बदहाली नेताओं को याद आती है, यह सवाल अब भी कायम है।